By: pashu-aahar-me-urea-ka-truth
Posted On : 03 Jul, 2026
क्या आप भी पशु आहार (Cattle Feed) की बोरी पर 'यूरिया' लिखा देखकर डर जाते हैं? कई पशुपालक भाइयों के मन में यह सवाल हमेशा रहता है कि जो यूरिया खेतों में फसलों के लिए डाला जाता है, भला वो हमारे बेजुबान पशुओं के खाने में क्यों मिलाया जा रहा है? कुछ लोग इसे जहर मानते हैं, तो वहीं आधुनिक डेयरी फार्मिंग करने वाले बड़े किसान इसका सही इस्तेमाल करके अपनी फीडिंग कॉस्ट (दूध उत्पादन की लागत) को आधा कर लेते हैं।
आज इस ब्लॉग में हम बिना किसी मिलावट के, बिल्कुल सीधे और वैज्ञानिक शब्दों में जानेंगे कि पशु आहार में यूरिया का असली सच क्या है और नीरवी (Neervi) इस तकनीक का उपयोग आपके पशुओं की भलाई के लिए कैसे करता है.
सीधा जवाब है: नहीं, बिल्कुल नहीं! लेकिन केवल तब, जब इसकी मात्रा सही और संतुलित हो।
वैज्ञानिक भाषा में कहें तो गाय और भैंस जैसे जुगाली करने वाले पशुओं (Ruminants) के पेट की बनावट इंसानों या अन्य जानवरों से बिल्कुल अलग होती है। इनके पेट के पहले और सबसे बड़े हिस्से को 'रूमेन' (Rumen) कहा जाता है। इस रूमेन के अंदर करोड़ों छोटे-छोटे सुरक्षात्मक बैक्टीरिया (Microbes) रहते हैं।
जब पशु यूरिया खाता है, तो ये बैक्टीरिया उस यूरिया को खाकर उसे 'माइक्रोबियल प्रोटीन' में बदल देते हैं। बाद में यही प्रोटीन पशु के शरीर में जाकर दूध बनाने और उसकी मांसपेशियों को मजबूत करने के काम आता है। यानी यूरिया सीधे तौर पर पशु के शरीर को नहीं, बल्कि उसके पेट के मददगार बैक्टीरिया को पोषण देता है।
अगर वैज्ञानिक मानकों के अनुसार सही अनुपात में इसका उपयोग किया जाए, तो इसके कई फायदे हैं:
कम लागत में हाई-प्रोटीन: सोयाबीन, बिनौला या सरसों की खली जैसी महंगी चीजों की तुलना में यूरिया नाइट्रोजन (प्रोटीन का मुख्य स्रोत) का एक बेहद किफायती जरिया है।
सूखे चारे की पाचकता बढ़ाना: राजस्थान जैसे क्षेत्रों में जहां सूखे चारे (खाखला या तूड़ा) का उपयोग ज्यादा होता है, वहां यूरिया चारे को मुलायम बनाता है जिससे पशु उसे आसानी से पचा लेते हैं.
दूध उत्पादन में निरंतरता: यह पशु के शरीर में नाइट्रोजन के स्तर को गिरने नहीं देता, जिससे दूध उत्पादन में अचानक आने वाली गिरावट रुक जाती है।
यूरिया फायदेमंद जरूर है, लेकिन जरा सी भी लापरवाही इसे खतरनाक 'यूरिया टॉक्सिसिटी' (Urea Toxicity) यानी जहर में बदल सकती है। घर पर खुद से नापकर यूरिया मिलाना बेहद जोखिम भरा है क्योंकि:
1% का सख्त नियम: पशु के कुल सूखे राशन में यूरिया की मात्रा 1% से अधिक कभी नहीं होनी चाहिए।
छोटे बछड़े-बछड़ियों के लिए मनाही: जिन छोटे बछड़े या बछड़ियों का रूमेन (पेट) अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है, उन्हें यूरिया भूलकर भी नहीं देना चाहिए।
पानी के साथ सीधे संपर्क का खतरा: अगर यूरिया सीधे पानी में घुलकर पशु के पेट में चला जाए, तो यह तुरंत जहर का रूप ले सकता है।
घर पर यूरिया का सही संतुलन बनाना लगभग असंभव है। इसी समस्या का वैज्ञानिक समाधान है नीरवी पशु आहार.
हमारी अत्याधुनिक और हाई-टेक लैबोरेट्रीज (Lab-tested manufacturing) में, विशेषज्ञों की देखरेख में यूरिया को बिल्कुल सटीक और सुरक्षित मात्रा में मिक्स किया जाता है. हम यह सुनिश्चित करते हैं कि यह दाने-दाने में इस तरह मिल जाए कि पशु को बिना किसी साइड-इफेक्ट के केवल इसके पोषण संबंधी लाभ (हाई प्रोटीन और बेहतर पाचन) ही मिलें।
सुरक्षित पोषण, बेहतर दूध उत्पादन – यही है नीरवी का वादा!